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मन नहीं करता… फिर भी करना है

निर्मला जी पिछले कुछ महीनों से बहुत थक चुकी थीं। बाहर से देखने पर उनकी ज़िंदगी में कोई बड़ी कमी नहीं थी। घर था, पति थे, बच्चे थे, रोज़मर्रा की ज़िम्मेदारियाँ थीं। लेकिन उनके भीतर जैसे कुछ धीरे-धीरे बुझ गया था। सुबह आँख खुलती तो मन में पहला ख्याल आता—“आज भी वही सब करना है।” रसोई में जाने का मन नहीं करता। घर समेटने का मन नहीं करता। किसी से बात करने का मन नहीं करता। यहाँ तक कि कभी-कभी नहाने और तैयार होने का भी मन नहीं करता था। वह अपने कमरे में बैठी रहतीं और सोचतीं, “अब मुझसे नहीं होगा। बहुत कर लिया। अब क्या रखा है मेरी ज़िंदगी में?” धीरे-धीरे उन्होंने हर काम से दूरी बनानी शुरू कर दी। उन्हें लगता था कि कुछ न करना ही शायद आराम है। जब मन इतना थक गया है, तो क्यों खुद को किसी काम में लगाएँ? लेकिन आराम के नाम पर उनके दिन फोन की स्क्रीन के सामने बीतने लगे। कभी एक रील, फिर दूसरी, फिर तीसरी। उसके बाद यूट्यूब पर किसी और की ज़िंदगी देखना—किसी की यात्रा, किसी का घर, किसी की सफलता, किसी के रिश्ते। घंटों बीत जाते और निर्मला जी वहीं बैठी रहतीं। लेकिन रात को जब फोन हाथ से छूटता, तो मन और भारी हो जाता। एक...

सुषमा जी का एक कदम

जब सुषमा जी से पूछा गया — ‘आप क्या करती हैं?सुषमा जी साठ साल की हो चुकी थीं। उनका घर अच्छा था। पति थे, बच्चे थे, बहू थी, पोते-पोतियाँ थे। घर में किसी चीज़ की कमी नहीं थी। सुबह से शाम तक उनका समय कभी रसोई में, कभी घर के काम में और कभी बच्चों की चिंता में निकल जाता था। उन्हें अपने परिवार से बहुत प्यार था। इतना प्यार कि धीरे-धीरे उनका परिवार ही उनकी पूरी दुनिया बन गया था। एक दिन सुषमा जी अपनी बहू के साथ बाज़ार गईं। वहीं उनकी मुलाकात उनकी बचपन की सहेली राधा से हो गई। सुषमा जी बहुत खुश हुईं। “अरे राधा! देखो, ये मेरी बहू है। और ये राधा है, मेरी बचपन की सहेली। हमने साथ में पढ़ाई की थी।” फिर सुषमा जी हँसते हुए अपनी बहू से बोलीं, “तुम्हें पता है, राधा ने अपने परिवार के खिलाफ जाकर अपना छोटा-सा कारोबार शुरू किया था। उस समय सबने मना किया था इसे।” राधा मुस्कुराई। “हाँ, छोटा ही था। लेकिन इतने सालों में वही छोटा-सा कारोबार अब काफी बड़ा हो गया है।” सुषमा जी ने गर्व से कहा, “अच्छा! बहुत बढ़िया किया तुमने।” कुछ देर दोनों पुरानी बातें करती रहीं। फिर राधा ने सहजता से पूछा, “और तुम सुषमा? तुम क्या कर रही ह...